गठबंधन

रोशनी ..एक सावली सी,उंचीपुरी सी छरहरी सी सुंदर नयननक्ष वाली खूबसूरत 30 , 32 साल की युवती ,, अपने नाजुक पैरों पर बैठी दाहिनी तरफ झुकी उसकी लम्बी घनी चोटी,जो आ़गन की मिट्टी छू रही है …
आज भोर से ही काम मे मगन हो गयी है ।
आंगण मे साफ सफाई करके एक सुंदर सी रंगोली बना रही है. अपने ही खयालो मे मस्त रोशनी,अपने बारे में सोच रही थी हर बार की तरह इस बार भी, नया रिश्ता,,पता नही ,कैसा होगा ,हमेशा की तरह दहलीज पर कदम रखते ही लौट ना जाये।
अब मुझे आदत हो गयी है लडकेवाले आते है मेजवानी खाते है ,उटपटांगसे सवाल पुछते है और बादमें जबाब देणे के बहाणे मुकर जाते है .
क्या लिखा है पता नही किस्मत मे मेरी , मुझे कुछ नही लगता ,आदत सी हो गई है ,लडके वाले आते है जाँच पडताल करते और वापीस हो जाते.
ईश्वर ना करे आज भी ऐसा ही कुछहो।
बाईस बरस की हुई, और अम्मा बाबा ने रिश्ता देखना शुरू किया ,अब तक छत्तीस लडके देख चुके है मुझे ,और हर बार ,नही यही जबाब आया, बडे दुखी है माता पिता,और मै भी।
शायद नही ,मुझे नही अपने आप मे कोई अपूर्णता नजर आती ,मै परिपूर्ण नारीशक्ती ,अपने आपको पूर्ण समझती हू

मुझे किसी तरह की कोई कमी नजर नही आती अपनेमे-. रंगत का सावला होना या भरी हुई देह वृष्टी ना होना कोई अपूर्णत्व नही है, हम लडकियाँ कहाँ लडको मे कमियाँ देखती है,हमे तो एक अच्छा जीवन साथी चाहिए होता है ,पता नही लडके वाले क्यों इतनी जाँच पडताल करते है ,खैर छोडो जो है सो है ,मै आत्मनिर्भर स्त्री हूँ. पचास हजार रुपये महिना कमाती हूँ अपना भार स्वयं उठा सकती हूँ अपनी रक्षा स्वयं कर सकती हूँ।
जो भी हो आज का निर्णय, मुझे कोई फर्क नही पडता ,रहा सवाल माता पिता का ,उनके लिये मै समर्पित हूँ ,इस बार प्रसंग का सामना करुंगी. जो भी निर्णय आये .
रोशनी…. रोशनी …..
जल्दी खतम करो रंगोली बनाना. सारे काम पडे है. तुम्हारी तैयारी भी बाकी है अभी, चलो स्नान आदि से निवृत्त हो लो ।लडकेवाले ग्यारा बजे तक पहूँच जायेंगे. सब कुछ निपटाना है .
आई ..मा ..आई ..आई आई … अभी समेट लेती हूँ मै,,आप ठंड रखे,,टेन्शन न लेवे..
टक टक ……टक..टक.
अरे भई कोई है…..मिश्र साहब.है क्या घर पर…..स्त्री हिंदी लघुकथा
अरे…..आईए आईए… महानुभाव प्रणाम …
आने मे कोई तकलीफ तो नही हुई..यु तो हमारे घर का पता आसान है …..
नही ,,,नही ,,,कोई तकलीफ नही ..
बैठिए…… आराम से
सर्वप्रथम परिचय हो जाये ..ना … ना ,, आप सभी लोग प्रथम जलपान करे ततपश्चात हम परिचय करवायेंगे…विधिवत संगोष्टी होने के बाद लडका लडकी आपस मे बात करणे उपर छत पर भेजे गए..ताकि वे इकदूजे को जान सकें।
बातचीत के दौरान लडके(अमर)ने बताया की पाँच वर्ष पूर्व हमारे परिवार का बहुत भयानक एक्सीडेंट हुआ ,जिसमे मुझे दो बहुमूल्य वरदान गँवानै पडे।
एक तो माताजी चल बसीं।
दुजे मेरा दाहिना पैर आहत हुआ, आज जो मै चल रहा हूँ यह नकली पाँव है .. मै अपूर्ण व्यक्तित्व हूँ ,आप मुझे नापसंत कर सकती है ,मुझे कोई शिकायत न होगी .मेरा प्रण है मुझे जो इस व्यंग के साथ स्वीकारेगा मै वहीं गठबंधन जोडूँगा ..
रोशनी को अमर की साफगोई बहुत भायी। उसने उसे कहा के आप बहुत अच्छी आंतर आत्मा के धनी है ..कितने स्पष्ट वक्ता है .मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर आपके विचार जानकर..
आप मुझसे जानना नही चाहेंगे, के मै अब तक कँवारी क्युं हुँ….तो सुनिये…मै भी आपसे एक बात स्पष्ट करना चाहुँगी।
मै एक स्त्री हूँ मगर मुझमे जो सौंदर्य अंग है उनके सिर्फ निशान है, वो मांसल नही है ,मगर उसमे कोई भी विकृती नही है.स्वास्थ्य की द्रुष्टी से मुझे चेकअप करवाया मेरे पालको ने.किसी प्रकार की कोई कमी नही है मै माँ बन  सकती  हूँ.जब मातृत्व आ जायेगा तब वह मांसल हो जायेंगे और मै अपने बच्चों को स्तनपान करा सकूँगी ,.सौंदर्य की दृष्टी से अयोग्य है वह….
आपको इस सत्यता से अवगत कराना मुझे जरुरी लगा ,आप मुझे ठुकरा सकते है .मुझे अब तक बहुतो ने इसी बात के लिए ठुकराया है ,मेरे लिये नया ना होगा इसलिये मैने आपसे ये कहना उचित समझा विवाह पश्चात आपको पश्चाताप न करना पडे।
“स्पष्टता और पारदर्शकता” रिश्तो मे जरूरी होती है.

मैं बहुत विश्वास करती हूँ .इसलिये मैने आपसे सभी कुछ कह दिया. आगे आपकी मर्जी
मुझे तो आप बहुत ही स्पष्ट और पारदर्शक व्यक्तीत्व के धनी लगे ,मै अति प्रभावित हूँ आपसे. मैं आप सा ही जीवनसाथी तलाश रही थी. आप चाहे तो हम “जीवन नैया” के “” खिवैया”” बन सकते है ..
आईए चलते है …. .नीचे सभी लोगो को खुशखबर जो देनी है,..हाँ ..यह खुशखबर ही तो है…”अमर रोशनी” विवाह संपन्न होने जा रहा है ,
मै भी आपसी ही सुशील  सह्दयजीवंनसंगिनी चाहता था ..आईए मेरा हाथ थाम लीजिये.. अरे अरे संभलकर… सिढियाँ सकरी है, मगर हाँ ..खुशियों की नगरी तक ले जायेंगी हमे…
आईए …आईए….न ….
.इस खुले आसमां के नीचे हम वचनबद्ध हो ले ..मै तुम्हे अपनाऊ, तुम मुझे सहेजना, संभालना…देखो रोशनी नील गगन के तारे भी जमी पर उतर आयेंगे जब हमारा “गठबंधन” होगा.

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