वाह रे गुलाब- हिंदी कविता
वाह रे गुलाब- हिंदी कविता

वाह रे गुलाब- हिंदी कविता

वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब…..
तुम्हारा न कोई तोड ..न हि कोई जवाब
वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब
ठाठ तो ऐसे ..जैसे सियासती
बगिया के हो तुम नवाब ….
प्रणय की तो तुम पूरी की पुरी किताब ….
वाह रे गुलाब …..वाह रे गुलाब..
सुंदरता तुम्हारी
बेमिसाल लाजवाब
किसी कमसीन हसीना की
घनेरी जुल्फों मे सजे
तो रुखसार पर उतर आये
आसमां से आफताब….
वाह रे गुलाब …… वाह रे गुलाब…
पाकिजगी की बस
तुम हि हो मिसाल…
मंदिर मस्जित दोनो हि है तुमसे निहाल.
खुदा की पनाह मे
इबादत के लिए इक तुम ही
हो मुकम्मल ताज……..
वाह रे गुलाब …..वाह रे गुलाब
अहमियत और नियत तो इतनी,,,
अमन की राह मे बढ चलेे
वीर शहीदो के कदमोको
चूमने की तमन्ना हो जितनी
गुर तुम्हारे लाखो
उसका नही हिसाब……
वाह हे गुलाब ….वाह रे गुलाब…
महत्ता तुम्हारी इतनी….
फिर भी संग है काटे
रंगीनियों मे बसा वजुद तुम्हारा
हर लम्हा खुशबु हि बांटे
गुलेगुलजार होगी जिंदगी ….
खुशीयो मे बसी
गर होटो पे होगी हर वक्त
मुस्कुराहट ओर हसी
जिंदगी का हर सबक
तुमसे हि है ऐ गुलाब
मुरझाने से पहले
जी लेना है बे हिसाब
महकना ही जिंदगी है जनाब….
वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब…..

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