ये चालिस की उमर-हिंदी कविता
ये चालिस की उमर-हिंदी कविता

ये चालिस की उमर-हिंदी कविता

अभी तो थोडी सी फुरसत मीली है
जीम्मेदारी की गाडी रूक्सत हूई है
उम्मीदों के पतंग को जरा ढील दिया कर
बेख्याली से जी ले ये चालिस की उमर ।

थक जाते हो थोडा आराम कर लो
बेकरारी में थोडा सुकून ही भर लो
अधूरी ख्वाहीशोंको अब मुक्कमल कर
मनमर्जी से जी ले ये चालिस की उमर ।

आईने को खुद की नई पहचान करा दे
बालों की सफेदी को जरा रंगिन करा दे
इतराने की तेरी आदा और बरकरार कर
नजाकत से जी ले ये चालिस की उमर ।

बिछडे दोस्तों से थोडा राबता बढा दे
कभीकबार महफिल में चार चाॅंद लगा दे
बचे हूए बीस की फिकर ना किया कर
जिंदादिली से जी ले ये चालिस की उमर ।

रागिणी

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