कुछ ऐसी भी बाते
कुछ ऐसी भी बाते

कुछ ऐसी भी बाते

मनभावन गीत ,श्रृंखला मे आज फिर एक नया गीत…
1966 मे एक बडी ही खूबसूरत फिल्म आयी थी …
“अनुपमा”
जिसका संगीत हेमंत कुमार
गीत रचयिता कैफी आजमी
गायिका शहद भीनी आवाज की मल्लिका लता मंगेशकर जी थी..
इस चलचित्र का कथानक बडा ही विशेष था..फिल्मांकन भी विशेषता पूर्ण था ,काफी पसंदीदा भी रही ..फिल्म फेयर अवॉर्ड का नामांकन भी मिला…गीत भी काफी सुरीले बने थे …जिसमे एक गीत था..
कुछ दिल ने कहा ,,कुछ भी नही…
कुछ दिल ने सुना ,,,,कुछ भी नही
ऐसी भी बाते होती हैं ऐसी भी बाते होती है.
लेता है दिल अंगडाइयाॅ
इस दिलको समझाऐ कोई
अरमान आखें खोल दे
रुसवा न हो जाए कोई
पलकों की ठंडी सेज पर सपनों की परियॉ सोती हैं!
ऐसी भी बाते होती हैं……
दिल की तसल्ली के लिए
झूठी चमक झूठा निखार
जीवन तो सूना ही रहा
सब समझे आई है बहार
कलियों से कोई पूछता, हॅसती हैं या वो रोतीं है.
ऐसी भी बाते होती है. ऐसी भी बाते होती है

यह गीत बोलती ऑखों की नायिका शर्मिला टागोर पर फिल्माया गया है.जो स्वंय एक बेहतरीन अदाकारा है है..कथानक नुसार वे पिता द्वारा दुतकारि हुई उपेक्षित कन्या है ,जो पैदा होते ही माता की मृत्यु का कारण बनी.. उसके पिता जो नशे की हालत मे तो प्रेम दर्शाते ,हर इच्छा पुरी करते ,मगर…..मगर…. दिन का उजाला उसे अभागन कहलाने पर मजबूर करता, परिणाम स्वरूप “उमा”
(किरदार का नाम) खामोशी मे लिपटी उदासीन शख्सियत. अपने आप को संजोने का प्रयत्न करती है..आत्मविश्वास हारी हूई “एक कमसीन हसीना “को अपनी ऑखो की भावभंगीमा से बखूबी निभाया है शर्मिला जी ने..
“अशोक “नायक धर्मेंद्र जो कथानक की लचकन से उमा के जीवन मे प्रवेश करते है .और जाने क्यूं उमा का वजूद महक उठता है .प्रेम भावना के स्पर्श से उमा पुलकित हो उठती है ऐसे मे इक दिन सुबह मुह अंधेरे ठंडेठंडे मौसम मे,जहा रात की सियाहि सिमट कर दुधिया आभा लिए दिवस अवतरित हो रहा है पंछी कलरव कर रहे है वसंती हवा हिलोरे ले रही है मगर ऐसे मौसम मे भी निरवता है निस्तब्धता छायी है..उमा के मन की,,जो विचलित हुआ है जो बहुत कुछ कहना चाहता है… “मगर…….
शिवरंजनी” राग मे बंधे अलौकिक शब्द , सुमधूर साजो संगीत , कानो मे शहद घोलती मीठी परमेश्वरी आवाज…..आहा…. अंतरात्मा को छू लेता ,ये गीत पहाडी वादियों मे उभरता है…अजीब सुकून देता है….सासो का पुट गाने मे चार चांद लगा जाता है…
खामोशीयाॅ भी कुछ कहने लगती है गुनगुनाने लगती हैं.
……..न मन कुछ कह रहा है न सुन रहा है…
मन मे बरसो से संजोई ,ऐसी , कही, अनकही , जाने कितनी बाते है जो न दिल कह पाता है न सुन पाता है..
मेरा दिल अनछुए जजबातो से कसमसा रहा है कोई मेरे इस नादां दिल को समझाओ..प्रेम दस्तक दे रहा है दिल के दरवाजे पर …मगरकैसे कहु…. इस प्रीत कि रीत निराली है प्रेम के मासूम सपने बंद पलको की ओट मे पनाह पाते ही भले …..क्यू कि कुछ बाते खामोशी से ही होती है.
खुशीयाॅ नुमाईशी होती है दिखावे के लिए मुखौटे लगाये जाते है ..मगर उससे दिली सुकून नही मिलता….कोई सचमुच जानना चाहता हो तो अंतर आत्मा को टटोले . हसी और गम का भेद समझे . क्यूॅ कि खामोशी की भी अपनी आवाज होती है
दिल नही कह पाता है ..दिल नही सून पाता है…
जरूर सुने ..प्यारा गीत … आशा है आप लोगों को भी बेहद पसंद आयेगा..

..@$

ये गाना सुनने के लिये हमारा  YOU TUBE CHANNEL देखिये

https://youtu.be/TV8rkcZxGUk

 

0

10 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!