मेरी कविता क्यूं न Sandeep12 .. तोड़कर सारे बंधन तो एक दिन जाना है तो फिर क्यूं ना जुड़ने के बहाने तलाशे बिखरना ही है हवा के झोके संग एक दिन तो फिर क्यूं ना साथ होने का फर्ज निभाएं हर दिन के साथ उम्र तो वैसे भी ढल रही है तो फिर क्यूं ना हररोज जीने का सबब ढूंढे Views: 23 0
Sundar arth
Thanks ❤️
लाजवाब
Thanks ❤️
Nice 💐💐
Thanks ❤️
बहुत बढिया 👌
Thanks ❤️