कविता
कविता

वाह रे गुलाब- हिंदी कविता

वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब….. तुम्हारा न कोई तोड ..न हि कोई जवाब वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब ठाठ तो ऐसे ..जैसे सियासती …

उम्र- हिंदी कविता

हर दौर मे उम्र इक नया तजुर्बा इख्तियार करती है …. कभी आंसुओं के  मझधार मे छोड देती है … .तो कभी जिंदगी को  गुले …

मायका

  जबसे हुई है शादी ससुराल बना है मायका सास ससुरजी की छाया मे खयाल रखती हु सबका पाकर सास की ममता माँ को भी …

बदहवास आबोहवा

हर सहर उदासी लिये चली आती है पंछियो की चहक भी विरानिया गाती है दिन का हर लम्हा सहमा ला लगता है जर्राजर्रा अकेला सा …

गौना

ऐ पिया ऐ पिया सुन सुन बतियाँ सब सखिया मिचियां अखियां बीच बजरिया करी ठिठौलियां हाय दैया हाय हाय दैया…… फैली कजरिया बिखरी गजरिया चटखी …

error: Content is protected !!