वही समा ..वही धुंध …..वही अलसाया सा मौसम …सब कुछ वही .. वही सब कुछ ,,जो तुझे पसंद था..,,,
..जिसकी तुझे चाह थी ….पेडों की ओट मे छुपकर कशिश भरी आवाज से मेरे नाम की पुकार … ओम…….,,,,,,ओम…,,,,,,,, प्रतिध्वनी सुनकर मधुर खिलखिलाना तेरा .
कितनी खूबसुरत कत्था कत्था आँखो से जिसमे जाने क्याक्या था दिवाना हुआ जाता था मै उनकी हर नजाकत से उन्ही आँखो से आसमान मे ,भर आये काले काले बादलो मे अजीबोगरीब परछाईयां को टटोलना ढु़ँढना … तेरा
बातबात पर खुशी से उछलकर आसमां को बाहो मे् भर लेने की वो गहरी तमन्नाा … तितली बन हर फूल को चूमने की तेरी वो चाह….याद है मुझे..
एक शाँल दोनो मे ओढकर गुलाबी ठंड मे मेरा हाथ थाम ..कांधे पर सर टिकाये घंटो उनींदेउनीदे पुरवाई संग गुनगुनाते गुनगुनाते टहलना ,चलते चलते हल्की सी ठोकर पर लहरा कर मुझसे लिपटना और आँखों से दिलकी तह तक पहुँचना ….,,,ओह…,. सब याद आ रहा है मुझे …..बेचैन कर रहा है मुझे
मुझे अपने वजुद मे होने का बातबात पर अहसास करने वाली …
तुम ….. रौशनी …..रौशनी…..रोशनी
तुम..कहां हो…..कहां हो तुम.कहां ढूंढू मै तुम्हे ….
कहां गये सारे वादे …..
साथजीने मरने के इरादे … खो गई सारी कसमे
आज …..
इन खूबसुरत तन्हाई मे कहां से लाऊँ तुम्हे ….
कैसे सजाऊ हमारी आँखो ने देखे हुए सपने…
कैसे पुकारू तुम्हे….
खो गई ,,खो गई तुम ..मुकर गई ,तमाम मुहब्बत का वाकया भूल गई तुम
उस बेरहम जहां की हो गई …..
मेरी जफा से वफा न कर सकी …..
मुझे तन्हा छोड .. गुम . हो गई…..
……या खुदा,तु मुझे ये कहां ले आया ये कौन सा मंजर है.
जहाँ.हर तरफ बस छाया हैमेरी मुहब्बत का साया…..
य़ादों का कांरवा अभी ही तो थोडा थोडा पीछेपीछे होने लगा था सब कुछ धुंधलाने लगा था …
…..ए वक्त तु बडा निष्ठूर है
आगे आकर तुने ये क्या मंजर दिखा दिया
रुला दिया मेरे मासुम दिल को.
जालीम है तु दगाबाज है
रुसवा हो गया सब तहसनहस कर दिया और यहाँ लाकर मुझे मुँह चिडा रहा है..अरे
तुने मेरी जिंदगा छीन ली
हाँ …हाँ .. रौशनी मेरा वजुद था मेरी जिंदगी थी … अरे अरे तुने
साँसे रख छोडी इस शरीर मे मगर धडकने तो छीन ली
दिन की इस उजली धूप मे रात की काली सियाहि फैला दी…..
मेरे प्यार के सपनो को….
तुने आँसुओं की सुरत दे दी …. नागवार समय अरे..सब खत्म कर गया तु… तु नही जानता तुने क्या समेटा है ..लुटा है.
सच कहते है सब समय बडा बलवान होता है वो अपना हुआ तो सारी कायनात अपनी होती है…मेरी तो दुनिया ही उजड गई ….हवा के झोखों संग खुशीया आई और समंदर के सैलाब संग बह गयी ..कुछ न बचा ..बस…. अब तो…
मै,, मेरा गुमनाम प्यार , और ये गमगीन सा ….मौसम …….
@$
यादें
0

So beautiful kahani likhi gai hai
आभार
बहुत बढिया 👌
Thanku