प्रेम
प्रेम

शायद

जो आँखो की चमक है न तुम्हारी शरारतो के लिये बेकरार है शायद मिलन को तरसता मनुहार है तस्सवुर मे उतर आया करार है शायद …

यादें

वही समा ..वही धुंध …..वही अलसाया सा मौसम …सब कुछ वही .. वही सब कुछ ,,जो तुझे पसंद था..,,, ..जिसकी तुझे चाह थी ….पेडों की …

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