hindi poem
hindi poem

वाह रे गुलाब- हिंदी कविता

वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब….. तुम्हारा न कोई तोड ..न हि कोई जवाब वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब ठाठ तो ऐसे ..जैसे सियासती …

ये चालिस की उमर-हिंदी कविता

अभी तो थोडी सी फुरसत मीली है जीम्मेदारी की गाडी रूक्सत हूई है उम्मीदों के पतंग को जरा ढील दिया कर बेख्याली से जी ले …

उम्र- हिंदी कविता

हर दौर मे उम्र इक नया तजुर्बा इख्तियार करती है …. कभी आंसुओं के  मझधार मे छोड देती है … .तो कभी जिंदगी को  गुले …

मायका

  जबसे हुई है शादी ससुराल बना है मायका सास ससुरजी की छाया मे खयाल रखती हु सबका पाकर सास की ममता माँ को भी …

वर्षा रानी

वर्षा की धीमी फुहार से ….. गया है तनमन भीज … बिना संदेशा दिये चल दि …… उष्ण मौसम की खीज …… वर्षा आयी वर्षा …

महफिल शब्दोंकी

शब्दोंकें इस भरी महफिल में ईनसें दिलकी बातें कर लेतें हैं हंस खेलकर इनकें साथ कुछ वादें कर लेते हैं सुबहसे शाम तक मेरा साया …

बचपन

ऐ बचपन…तु कहां खो गया.. ये तुझे क्या हो गया…क्या तुझे याद नही वो सुहाने दिन वो युँ हि गईगई सी रातें …. न हसनें …

आईना

::::::::::::::::::::::::::आईना::::::::::::: ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: जिम्मेदारियों का बोझ ढोतेढोते ….. तमन्नाओं मे शिथिलता आई है .. ख्वाहिशों पर भी हल्कीहल्की झुर्रिया झिलमिलाई है … उम्मीदें लडखडाई है आईने …

अक्स

तेरे होठो से छुटी आधीअधुरी सिगरेट का एक कश क्या लगाया हवा मे मचलते धुएँ के हर एक छल्लो मे बस तेरा हि अक्स नजर …

error: Content is protected !!