ये कहां आ गयें हम…!!
ये कहां आ गयें हम…!!

ये कहां आ गयें हम…!!

हो

अब कहां होती हैं
मैफिल दोस्तों कीं
चौराहें पर,
हर कोई अकेले में
अपनें अपनें गम कें साथ
गुमसूम सां हैं….

कौन कहता हैं
खुल कें दिल कीं बात
भरोसें सें,
हर नजर शक सें
हर लब्ज फूंक कें
बोलतां हैं…

सुना हैं कम होता हैं
दुःख बांटने सें
अपनों में,
अपनों कें मायनें
कुछ खयालातं
बदलें हैं….

सिकुडसीं गयी हैं
दुनियां खुद में
इंटरनेट सें,
अजनबीं दिल में
और पडोसीं
बेगानें हूवें हैं…

 

…रघू देशपांडे
नांदेड …

0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!