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1981 में आई उमरावजान सालो बाद भी लोगोकी यादमें,दिमागमें,मनमें बसी है।उमरावजान का नाम लेतेही सामने आ जाते है उसके गीत,छोटी अमरीन और उमरावजानमें जान डालनेवाली रेखा। लखनौकी तवायफ उमरावजान को... More
हो अब कहां होती हैं मैफिल दोस्तों कीं चौराहें पर, हर कोई अकेले में अपनें अपनें गम कें साथ गुमसूम सां हैं…. कौन कहता हैं खुल कें दिल कीं बात... More
पंखुडियां गुलाब की डाली से गिरकर इल्तजा करती हैं .. के ऐ ….. पुरवाईयो जाओ जाकर यार को खबर दो आज न सही .. कल की सुबह का फिर... More
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कही नही…. रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी मुहब्बत का… जाना.. मेरी उठती पलकों... More
तू नही साथ मेरे तो तेरे यादोसे ही बसेरा बना लिया मैने तेरे चूडियोकी खनक से झरोका बना लिया तेरी पायल कि छनछनसे मेरा आँगन गुँज उठा तेरी तन कि... More
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