चार पंक्तियाँ *शायरी* Atulasmita ये बारिश की बौछार भी भीगा रही थी ना बार बार इसिलए, फ़िरसे तुम्हारी यादें आज सता रही थी बार बार अस्मिता मार्डीकर Views: 10 0
Wah
खूप सहज लिहिता तुम्ही.
सुरेख