शायरी
अपना अपना कहके सब गले लगा कर बडे इतरा रहे थे गौर से देखा तो पता चला, भरे मैफिल में मौका देख अपनों को …
अपना अपना कहके सब गले लगा कर बडे इतरा रहे थे गौर से देखा तो पता चला, भरे मैफिल में मौका देख अपनों को …
तुम्हारे तस्वीर के सहारे गुजारने लगे दिन रात सारे तुम समझो ना समझो मेरे इश्क़ के वो इशारे अस्मिता मार्डीकर 0
रुखा सा महसूस हो रहा हैँ दिल को ना अभी आँख नम हैँ ना कोई तुमसे शिकायत हैँ ये प्यार भी ना इस मोड पर …
अगर मीठे लब्ज कह दू तो चाहत बढ़ नहीं जाती किसीसे अक्सर देखा हैँ मैंने, मुहब्बत तो वो भी करते हैँ जो इजहार तक नहीं …
मौत सें पहिले भी एक मौत हैं देखो जरा अपनी मोहब्बत सें जुदा होकर कुछ पल के लिये अस्मिता मार्डीकर 0
मुझेसे मत पूछ की क्यों, तुमसे नजरें छुपा ली मैंने! तेरी तस्वीर जो थी मेरी आँखों में वही तुझीसे छुपा ली मैंने अस्मिता मार्डीकर …
ये बारिश की बौछार भी भीगा रही थी ना बार बार इसिलए, फ़िरसे तुम्हारी यादें आज सता रही थी बार बार अस्मिता मार्डीकर 0