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वाह रे गुलाब ...वाह रे गुलाब..... तुम्हारा न कोई तोड ..न हि कोई जवाब वाह रे गुलाब ...वाह रे गुलाब ठाठ तो ऐसे ..जैसे सियासती बगिया के हो तुम नवाब... More
हर दौर मे उम्र इक नया तजुर्बा इख्तियार करती है .... कभी आंसुओं के मझधार मे छोड देती है ... .तो कभी जिंदगी को गुले गुलजार कर देती है .मगर... More
मनभावन गीत ,श्रृंखला मे आज फिर एक नया गीत... 1966 मे एक बडी ही खूबसूरत फिल्म आयी थी ... "अनुपमा" जिसका संगीत हेमंत कुमार गीत रचयिता कैफी आजमी गायिका शहद... More
हर सहर उदासी लिये चली आती है पंछियो की चहक भी विरानिया गाती है दिन का हर लम्हा सहमा ला लगता है जर्राजर्रा अकेला सा दिखाई देता है जाने कैसी... More
मैने खुद हि खुद को ढूँढा हैे अपने आप मे पाया है आत्म विश्वास और संबल हि तो मेरी छाया है न मै कोमल न सुंदर न ,नाजुक... More
वर्षा की धीमी फुहार से ..... गया है तनमन भीज ... बिना संदेशा दिये चल दि ...... उष्ण मौसम की खीज ...... वर्षा आयी वर्षा आयी .... प्यारेप्यारे मोती लाई........ More
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