मेरी कविता कल फिर बहेगा प्रिती (Preeti) पंखुडियां गुलाब की डाली से गिरकर इल्तजा करती हैं .. के ऐ ….. पुरवाईयो जाओ जाकर यार को खबर दो आज न सही .. कल की सुबह का फिर इंतजार रहेगा हमारी खुशबुओं का दौर फिजाओं संग कल फिर बहेगा सरिता विलास बायस्कर… Views: 6 0