गझल

निगाहों की रजामंदी से …
तमन्नाये मचलती है …..
तमन्नयाओं के मचलन से
जजबात जवां होते है ….
दिल पिघलने लगता है …
पिघलता दिल लब्जो के
बहाने ढूँढता है …
औ कलम चलने लगती है …
इस कदर इश्क के
अफसाने बयां होते है …..
औ अमूमन हर आशिक दिल
गझल कहने लगता है……

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