चलो चिराग जलायें…
चलो चिराग जलायें…

चलो चिराग जलायें…

 

चलो मिलजुल कर चिराग जलायें

हर दिलमें रोशनी फैलायें

जात-धर्म कें नाम पर

लड पडनेंकी आदत छुडवायें

दानधर्म के झोली भरते हैंं

भुखकें मारे सेकडों बच्चे मरते हैं

कुछ भुखोंका भी खयाल किजिये

दिलमें रोशनीका चिराग जलायें

बेटीका पैदा होना पाप हो गया

बेटेकी आसमें संसार बढाया

बेटी को हर घरमें सन्मान मिलें

चलो हर दिलमें चिराग जलायें

बच्चा ना होने पर नारीको सताया

सारा दोष समाजने उसीको दिया

अनाथालयसें बच्चा गोद लिजिये

दिलमें रोशनीका चिराग जलाये

नारी का आत्म सन्मान पहचानें

नारी को फैसला लेने अधिकार दिजिए

कुछ सन्मान नारी का किजीए

रोशनी का चिराग हर दिलमे जलाये

शीला रंगारी

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