दिल ए नादां मे इक
कसक थमी है ..
जानता है दिल
के वो आसपास
कही नही….
रुखसत भी हो
किस कदर अहसास
तेरी मुहब्बत का…
जाना..
मेरी उठती पलकों
का आसमां भी…तु ,
तु ही मेरी झुकती
पलको की जमी है
तसवीर भी तेरी
तसव्वुर भी तेरा
ख्याल भी तु हि
दिदार भी सिर्फ तेरा
तु हि तु …..बस
मै कहीं कहीं नही
तु हि तडपाती
रातों की काली
सियाही….
तु उम्मीदों का
रौशन सबेरा
यकीं मान ,
मेरी सुलगती
सांसो मे बस
तेरा हि बसेरा….
……..सरिता विलास बायस्कर……..
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