उम्र- हिंदी कविता
उम्र- हिंदी कविता

उम्र- हिंदी कविता

हर दौर मे उम्र इक नया तजुर्बा इख्तियार करती है …. कभी आंसुओं के  मझधार मे छोड देती है … .तो कभी जिंदगी को  गुले …

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