कान्हा ओ…..कान्हा
कान्हा ओ…..कान्हा

कान्हा ओ…..कान्हा

.अरे ओ कान्हा…..
सच्ची सच्ची इक बात बताओ
यूं झूठी बतियां ना बनाओ
झुठला कर मेरी बातों को
मेरे मन को यूं न बहलाओ….
.क्या सचमुच तुमही हो कान्हा
मेरे कान्हा…मेरे कान्हा…..
ये मिथ्या नैनों की बोली
ये मसकरी हसी ठिठौली….
ये दुध माखन की चोरी
गोप गोपी संग जोराजोरी
ये सुमधुर सी बंसी बजाना ….
हर समय सभी के मन को रिझाना
ये ग्वाल बन गौवन को चराना
कंबली ले बनबन मंडराना
ये बल प्रयोग ,ये रास भोग….
ये मुक्ती मोक्ष ,,ये जन्म योग
……..क्या….सचमुच तुम्ही हो कान्हा….
मेरे कान्हा….. मेरे कान्हा…………
नंदबाबा को बनाने वाले
मैया यशोदा को मनाने वाले
बलदाऊ को सताने वाले
गोपन संग धूम मचाने वाले……
गोपियो संग रास रचाने वाले…..
गिरधर गोपाल तुम्ही मतवाले
सुघड.सलोने श्याम निराले
अवधबिहारी जग रखवाले…
मुरली मनोहर मदन गोपाला
तुम सबके हिय बांके लाला
मीठी मीठी बातें न बनाओ
आज मुझे सब सच बतलाओ
क्या….. सचमुच तुमही हो….कान्हा…………
.मेरे कान्हा …. मेरे कान्हा
तुम ही जगत के पालन हारे
तुमही दुख्ख निवारन वारे
तुमही पालक दयानिधाना…
क्या सचमुच तुम्ही हो कान्हा ….
मेरे कान्हा …….मेरे कान्हा…..@$
…..

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