कविता
कविता

वाह रे गुलाब- हिंदी कविता

वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब….. तुम्हारा न कोई तोड ..न हि कोई जवाब वाह रे गुलाब …वाह रे गुलाब ठाठ तो ऐसे ..जैसे सियासती …

उम्र- हिंदी कविता

हर दौर मे उम्र इक नया तजुर्बा इख्तियार करती है …. कभी आंसुओं के  मझधार मे छोड देती है … .तो कभी जिंदगी को  गुले …

मायका

  जबसे हुई है शादी ससुराल बना है मायका सास ससुरजी की छाया मे खयाल रखती हु सबका पाकर सास की ममता माँ को भी …

चलो चिराग जलायें…

  चलो मिलजुल कर चिराग जलायें हर दिलमें रोशनी फैलायें जात-धर्म कें नाम पर लड पडनेंकी आदत छुडवायें दानधर्म के झोली भरते हैंं भुखकें मारे …

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