मेरी कविता अक्स sarita2002 तेरे होठो से छुटी आधीअधुरी सिगरेट का एक कश क्या लगाया हवा मे मचलते धुएँ के हर एक छल्लो मे बस तेरा हि अक्स नजर आया युँ लगा जैसे धडकनो ने साँसो से सारी तन्हाईयाँ सारी उदासीयाँ उगल दी और उनींदी निगाहों मे तु हौले से मुसकाया…. @$ Views: 9 0