आईना

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जिम्मेदारियों का बोझ ढोतेढोते …..
तमन्नाओं मे शिथिलता आई है ..
ख्वाहिशों पर भी हल्कीहल्की
झुर्रिया झिलमिलाई है …
उम्मीदें लडखडाई है
आईने ने चुगली खायी है …..
गैरजिम्मेदारी की तोहमत लगायी है….
मगर ऐ शीशे तुने सिर्फ
मुझे मेरी शक्ल ही दिखाई है
न देख युं.. मुझे……..
अरे मेरे वजुद मे बहुत गहराई है ….
.मैने कभी शिकस्त नही खाई है…..
हर रास्ते ,हरमोड ,हर पडाव पे
जिंदगी से रिश्तेदारी निभाई है. ..
नाज है मुझे मेरी इस शख्शियत पे ..
जो ऩ सुनहरे पल मे इतराई है

विपरित समय प्रवाह मे बौखलाई है.
बस तेरा ही शुक्र है मौला ..
तुने ही ये खूबसुरत दुनिया बनाई है..
आईने का क्या है वो तो हमेशा से हरजाई है…

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