शायद

जो आँखो की चमक है न
तुम्हारी शरारतो के लिये बेकरार
है शायद
मिलन को तरसता मनुहार है
तस्सवुर मे उतर आया करार
है शायद
उनींदी पलको पर नशे का खुमार है
छुईमुई की शरमो हया का निखार
हैै शायद
मदहोश महक से तरबतर समा बेजारहै
तुम्हारी बहकती सांसो के इत्र का गुबार
है शायद
अरे हां औरऔर आंखो मे ये जो पानीपानी है
दास्ताने इश्क मे अश्को का तलबगार
है शायद
धडकने न बढाओ

बस

आ भी जाओ जानम
ये सलोना दिल

तुम्हारे प्यार का

बिमार हैशायद
समझ से परे ..है ..सब कुछ
ये दिल …

ये तुम .
और ये प्यार ..है

शायद

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