महफिल शब्दोंकी
महफिल शब्दोंकी

महफिल शब्दोंकी

शब्दोंकें इस भरी महफिल में

ईनसें दिलकी बातें कर लेतें हैं

हंस खेलकर इनकें साथ

कुछ वादें कर लेते हैं

सुबहसे शाम तक मेरा साया होते हैं

मुझे गले लगाकर मेरे साथ रहतें हैं

गजब है हमारे दोस्तीकें मायनें

स्याही बनकर कागजपर उतर आते हैं

शीला रंगारी

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