अक्स

तेरे होठो से छुटी
आधीअधुरी सिगरेट का
एक कश क्या लगाया
हवा मे मचलते धुएँ के हर एक
छल्लो मे बस तेरा हि
अक्स नजर आया
युँ लगा जैसे धडकनो ने
साँसो से सारी तन्हाईयाँ
सारी उदासीयाँ उगल दी
और उनींदी निगाहों मे
तु हौले से मुसकाया….

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