मेरी कविता
मेरी कविता

ये कहां आ गयें हम…!!

हो अब कहां होती हैं मैफिल दोस्तों कीं चौराहें पर, हर कोई अकेले में अपनें अपनें गम कें साथ गुमसूम सां हैं…. कौन कहता हैं …

हमकदम

जिंदगी की धूप छांव……. कभी डालडाल ,कभी पात. पात… कभी मौनमौन , कभी बातबात….. कभी पगडंडी सुंदरमनभावन ….. कभी पथरीला कांटों का बन…. हर पल …

दिलकश कसक

जाने क्यू बडाअजीब होता है तेरे पास होने का अहसास लगता है लपेट रखा है मुझे तेरी मखमली महकती सांसों ने बहकते बहकते जजबातो ने …

तू नही साथ मेरे

तू नही साथ मेरे तो तेरे यादोसे ही बसेरा बना लिया मैने तेरे चूडियोकी खनक से झरोका बना लिया तेरी पायल कि छनछनसे मेरा आँगन …

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