कविता
वर्णों को शब्दो मे बदल कर जब भावनाओं के धागो मे पिरोया तो भावनाओं की श्रंखला कविता बन गई जब कभी किसी इठलाती ,,इतराती बलखाती …
वर्णों को शब्दो मे बदल कर जब भावनाओं के धागो मे पिरोया तो भावनाओं की श्रंखला कविता बन गई जब कभी किसी इठलाती ,,इतराती बलखाती …
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कही नही…. रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी मुहब्बत …
जाने क्यू बडाअजीब होता है तेरे पास होने का अहसास लगता है लपेट रखा है मुझे तेरी मखमली महकती सांसों ने बहकते बहकते जजबातो ने …
तू नही साथ मेरे तो तेरे यादोसे ही बसेरा बना लिया मैने तेरे चूडियोकी खनक से झरोका बना लिया तेरी पायल कि छनछनसे मेरा आँगन …