आईना
::::::::::::::::::::::::::आईना::::::::::::: ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: जिम्मेदारियों का बोझ ढोतेढोते ….. तमन्नाओं मे शिथिलता आई है .. ख्वाहिशों पर भी हल्कीहल्की झुर्रिया झिलमिलाई है … उम्मीदें लडखडाई है आईने …
::::::::::::::::::::::::::आईना::::::::::::: ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: जिम्मेदारियों का बोझ ढोतेढोते ….. तमन्नाओं मे शिथिलता आई है .. ख्वाहिशों पर भी हल्कीहल्की झुर्रिया झिलमिलाई है … उम्मीदें लडखडाई है आईने …
तेरे होठो से छुटी आधीअधुरी सिगरेट का एक कश क्या लगाया हवा मे मचलते धुएँ के हर एक छल्लो मे बस तेरा हि अक्स नजर …
जो आँखो की चमक है न तुम्हारी शरारतो के लिये बेकरार है शायद मिलन को तरसता मनुहार है तस्सवुर मे उतर आया करार है शायद …
किसी दिन फुरसत से अपनी शख्सियत से मिलो सारा हुनर सामने आ जायेगा फिर असर पे गौर करना छत की सुराख से आती धुप की …
किश्तो मे जीतेजीते …. उकता गया ये दिल…… ऐ जिंदगी तु कभी फुरसत से आ के हमसे मिल कुछ तो मुकम्मल हो दिल मे दबी …
आशिकाना रात मे पुनम का चाँद भी बादलो की ओट से मौसम का जायका लेता नजर आया …. ,,तु ,,क्या आया जिंदगी मे जीने का …
.अरे ओ कान्हा….. सच्ची सच्ची इक बात बताओ यूं झूठी बतियां ना बनाओ झुठला कर मेरी बातों को मेरे मन को यूं न बहलाओ…. .क्या …
हो अब कहां होती हैं मैफिल दोस्तों कीं चौराहें पर, हर कोई अकेले में अपनें अपनें गम कें साथ गुमसूम सां हैं…. कौन कहता हैं …
पंखुडियां गुलाब की डाली से गिरकर इल्तजा करती हैं .. के ऐ ….. पुरवाईयो जाओ जाकर यार को खबर दो आज न सही .. …
जिंदगी की धूप छांव……. कभी डालडाल ,कभी पात. पात… कभी मौनमौन , कभी बातबात….. कभी पगडंडी सुंदरमनभावन ….. कभी पथरीला कांटों का बन…. हर पल …