शायरी
मुझेसे मत पूछ की क्यों, तुमसे नजरें छुपा ली मैंने! तेरी तस्वीर जो थी मेरी आँखों में वही तुझीसे छुपा ली मैंने अस्मिता मार्डीकर …
मुझेसे मत पूछ की क्यों, तुमसे नजरें छुपा ली मैंने! तेरी तस्वीर जो थी मेरी आँखों में वही तुझीसे छुपा ली मैंने अस्मिता मार्डीकर …
ये बारिश की बौछार भी भीगा रही थी ना बार बार इसिलए, फ़िरसे तुम्हारी यादें आज सता रही थी बार बार अस्मिता मार्डीकर 0
.. तोड़कर सारे बंधन तो एक दिन जाना है तो फिर क्यूं ना जुड़ने के बहाने तलाशे बिखरना ही है हवा के झोके संग एक …
हर सहर उदासी लिये चली आती है पंछियो की चहक भी विरानिया गाती है दिन का हर लम्हा सहमा ला लगता है जर्राजर्रा अकेला सा …
मैने खुद हि खुद को ढूँढा हैे अपने आप मे पाया है आत्म विश्वास और संबल हि तो मेरी छाया है न मै …
ऐ पिया ऐ पिया सुन सुन बतियाँ सब सखिया मिचियां अखियां बीच बजरिया करी ठिठौलियां हाय दैया हाय हाय दैया…… फैली कजरिया बिखरी गजरिया चटखी …
वर्षा की धीमी फुहार से ….. गया है तनमन भीज … बिना संदेशा दिये चल दि …… उष्ण मौसम की खीज …… वर्षा आयी वर्षा …
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कहीनही…. रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी मुहब्बत का… …
शब्दोंकें इस भरी महफिल में ईनसें दिलकी बातें कर लेतें हैं हंस खेलकर इनकें साथ कुछ वादें कर लेते हैं सुबहसे शाम तक मेरा साया …
ऐ बचपन…तु कहां खो गया.. ये तुझे क्या हो गया…क्या तुझे याद नही वो सुहाने दिन वो युँ हि गईगई सी रातें …. न हसनें …