कविता
कविता

शायरी

  मुझेसे मत पूछ की क्यों, तुमसे नजरें छुपा ली मैंने! तेरी तस्वीर जो थी मेरी आँखों में वही तुझीसे छुपा ली मैंने अस्मिता मार्डीकर …

बदहवास आबोहवा

हर सहर उदासी लिये चली आती है पंछियो की चहक भी विरानिया गाती है दिन का हर लम्हा सहमा ला लगता है जर्राजर्रा अकेला सा …

गौना

ऐ पिया ऐ पिया सुन सुन बतियाँ सब सखिया मिचियां अखियां बीच बजरिया करी ठिठौलियां हाय दैया हाय हाय दैया…… फैली कजरिया बिखरी गजरिया चटखी …

वर्षा रानी

वर्षा की धीमी फुहार से ….. गया है तनमन भीज … बिना संदेशा दिये चल दि …… उष्ण मौसम की खीज …… वर्षा आयी वर्षा …

महफिल शब्दोंकी

शब्दोंकें इस भरी महफिल में ईनसें दिलकी बातें कर लेतें हैं हंस खेलकर इनकें साथ कुछ वादें कर लेते हैं सुबहसे शाम तक मेरा साया …

बचपन

ऐ बचपन…तु कहां खो गया.. ये तुझे क्या हो गया…क्या तुझे याद नही वो सुहाने दिन वो युँ हि गईगई सी रातें …. न हसनें …

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