शब्दपर्ण
मेरी कविता
तू नही साथ मेरे
तू नही साथ मेरे तो तेरे यादोसे ही बसेरा बना लिया मैने तेरे चूडियोकी खनक से झरोका बना लिया तेरी...
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दिलकश कसक
जाने क्यू बडाअजीब होता है तेरे पास होने का अहसास लगता है लपेट रखा है मुझे तेरी मखमली महकती सांसों...
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दिल ए नादां
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कही नही…. रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी...
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कविता
वर्णों को शब्दो मे बदल कर जब भावनाओं के धागो मे पिरोया तो भावनाओं की श्रंखला कविता बन गई जब कभी किसी...
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हमकदम
जिंदगी की धूप छांव……. कभी डालडाल ,कभी पात. पात… कभी मौनमौन , कभी बातबात….. कभी पगडंडी सुंदरमनभावन...
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कल फिर बहेगा
  पंखुडियां गुलाब की डाली से गिरकर इल्तजा करती हैं .. के ऐ ….. पुरवाईयो जाओ जाकर यार को...
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ये कहां आ गयें हम…!!
हो अब कहां होती हैं मैफिल दोस्तों कीं चौराहें पर, हर कोई अकेले में अपनें अपनें गम कें साथ गुमसूम...
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कान्हा ओ.....कान्हा
.अरे ओ कान्हा..... सच्ची सच्ची इक बात बताओ यूं झूठी बतियां ना बनाओ झुठला कर मेरी बातों को मेरे मन...
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चाँद
आशिकाना रात मे पुनम का चाँद भी बादलो की ओट से मौसम का जायका लेता नजर आया .... ,,तु ,,क्या आया जिंदगी...
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अधूरी जिंदगी
किश्तो मे जीतेजीते .... उकता गया ये दिल...... ऐ जिंदगी तु कभी फुरसत से आ के हमसे मिल कुछ तो मुकम्मल...
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संस्कृती धरोहर स्त्री
किसी दिन फुरसत से अपनी शख्सियत से मिलो सारा हुनर सामने आ जायेगा फिर असर पे गौर करना छत की सुराख...
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शायद
जो आँखो की चमक है न तुम्हारी शरारतो के लिये बेकरार है शायद मिलन को तरसता मनुहार है तस्सवुर मे उतर...
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अक्स
तेरे होठो से छुटी आधीअधुरी सिगरेट का एक कश क्या लगाया हवा मे मचलते धुएँ के हर एक छल्लो मे बस तेरा...
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आईना
::::::::::::::::::::::::::आईना::::::::::::: ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: जिम्मेदारियों...
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बचपन
ऐ बचपन...तु कहां खो गया.. ये तुझे क्या हो गया...क्या तुझे याद नही वो सुहाने दिन वो युँ हि गईगई सी रातें...
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महफिल शब्दोंकी
शब्दोंकें इस भरी महफिल में ईनसें दिलकी बातें कर लेतें हैं हंस खेलकर इनकें साथ कुछ वादें कर लेते...
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कसक
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कहीनही.... रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी...
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वर्षा रानी
वर्षा की धीमी फुहार से ..... गया है तनमन भीज ... बिना संदेशा दिये चल दि ...... उष्ण मौसम की खीज ...... वर्षा...
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गौना
ऐ पिया ऐ पिया सुन सुन बतियाँ सब सखिया मिचियां अखियां बीच बजरिया करी ठिठौलियां हाय दैया हाय हाय...
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उम्र का फलसफा
  मैने खुद हि खुद को ढूँढा   हैे अपने आप मे पाया है आत्म विश्वास और संबल हि तो मेरी छाया है न...
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बदहवास आबोहवा
हर सहर उदासी लिये चली आती है पंछियो की चहक भी विरानिया गाती है दिन का हर लम्हा सहमा ला लगता...
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क्यूं न
.. तोड़कर सारे बंधन तो एक दिन जाना है तो फिर क्यूं ना जुड़ने के बहाने तलाशे बिखरना ही है हवा के...
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चलो चिराग जलायें...
  चलो मिलजुल कर चिराग जलायें हर दिलमें रोशनी फैलायें जात-धर्म कें नाम पर लड पडनेंकी...
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मायका
  जबसे हुई है शादी ससुराल बना है मायका सास ससुरजी की छाया मे खयाल रखती हु सबका पाकर सास...
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उम्र- हिंदी कविता
हर दौर मे उम्र इक नया तजुर्बा इख्तियार करती है .... कभी आंसुओं के  मझधार मे छोड देती है...
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गझल
निगाहों की रजामंदी से ... तमन्नाये मचलती है ..... तमन्नयाओं के मचलन से जजबात जवां होते है .... दिल...
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वाह रे गुलाब- हिंदी कविता
वाह रे गुलाब ...वाह रे गुलाब..... तुम्हारा न कोई तोड ..न हि कोई जवाब वाह रे गुलाब ...वाह रे गुलाब ठाठ...
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