हिंदी कविता
हिंदी कविता

अक्स

तेरे होठो से छुटी आधीअधुरी सिगरेट का एक कश क्या लगाया हवा मे मचलते धुएँ के हर एक छल्लो मे बस तेरा हि अक्स नजर …

शायद

जो आँखो की चमक है न तुम्हारी शरारतो के लिये बेकरार है शायद मिलन को तरसता मनुहार है तस्सवुर मे उतर आया करार है शायद …

अधूरी जिंदगी

किश्तो मे जीतेजीते …. उकता गया ये दिल…… ऐ जिंदगी तु कभी फुरसत से आ के हमसे मिल कुछ तो मुकम्मल हो दिल मे दबी …

चाँद

आशिकाना रात मे पुनम का चाँद भी बादलो की ओट से मौसम का जायका लेता नजर आया …. ,,तु ,,क्या आया जिंदगी मे जीने का …

यादें

वही समा ..वही धुंध …..वही अलसाया सा मौसम …सब कुछ वही .. वही सब कुछ ,,जो तुझे पसंद था..,,, ..जिसकी तुझे चाह थी ….पेडों की …

कान्हा ओ…..कान्हा

.अरे ओ कान्हा….. सच्ची सच्ची इक बात बताओ यूं झूठी बतियां ना बनाओ झुठला कर मेरी बातों को मेरे मन को यूं न बहलाओ…. .क्या …

तू नही साथ मेरे

तू नही साथ मेरे तो तेरे यादोसे ही बसेरा बना लिया मैने तेरे चूडियोकी खनक से झरोका बना लिया तेरी पायल कि छनछनसे मेरा आँगन …

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