कसक
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कहीनही…. रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी मुहब्बत का… …
दिल ए नादां मे इक कसक थमी है .. जानता है दिल के वो आसपास कहीनही…. रुखसत भी हो किस कदर अहसास तेरी मुहब्बत का… …
शब्दोंकें इस भरी महफिल में ईनसें दिलकी बातें कर लेतें हैं हंस खेलकर इनकें साथ कुछ वादें कर लेते हैं सुबहसे शाम तक मेरा साया …
ऐ बचपन…तु कहां खो गया.. ये तुझे क्या हो गया…क्या तुझे याद नही वो सुहाने दिन वो युँ हि गईगई सी रातें …. न हसनें …
::::::::::::::::::::::::::आईना::::::::::::: ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: जिम्मेदारियों का बोझ ढोतेढोते ….. तमन्नाओं मे शिथिलता आई है .. ख्वाहिशों पर भी हल्कीहल्की झुर्रिया झिलमिलाई है … उम्मीदें लडखडाई है आईने …
तेरे होठो से छुटी आधीअधुरी सिगरेट का एक कश क्या लगाया हवा मे मचलते धुएँ के हर एक छल्लो मे बस तेरा हि अक्स नजर …
जो आँखो की चमक है न तुम्हारी शरारतो के लिये बेकरार है शायद मिलन को तरसता मनुहार है तस्सवुर मे उतर आया करार है शायद …
किसी दिन फुरसत से अपनी शख्सियत से मिलो सारा हुनर सामने आ जायेगा फिर असर पे गौर करना छत की सुराख से आती धुप की …
किश्तो मे जीतेजीते …. उकता गया ये दिल…… ऐ जिंदगी तु कभी फुरसत से आ के हमसे मिल कुछ तो मुकम्मल हो दिल मे दबी …
आशिकाना रात मे पुनम का चाँद भी बादलो की ओट से मौसम का जायका लेता नजर आया …. ,,तु ,,क्या आया जिंदगी मे जीने का …
.अरे ओ कान्हा….. सच्ची सच्ची इक बात बताओ यूं झूठी बतियां ना बनाओ झुठला कर मेरी बातों को मेरे मन को यूं न बहलाओ…. .क्या …